अनुशासन के नाम पर बर्बरता: गुरुकुल में 11 साल के दिव्यांश की मौत
लखनऊ के आलमनगर स्थित रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में 11 साल के दिव्यांश द्विवेदी की मौत ने पूरे यूपी को झकझोर दिया है। आरोप है कि गुरुकुल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा उर्फ सौरभ ने बच्चे को “शैतानी” और नियम न मानने के नाम पर बेरहमी से पीटा। पूछताछ में संचालक ने कथित तौर पर माना कि गुस्से में उसने दिव्यांश को इतनी बुरी तरह मारा कि उसकी हालत बिगड़ गई और बाद में मौत हो गई।
शरीर पर चोटों के निशान, सिगरेट से जलाने का आरोप
दिव्यांश के शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसके शरीर पर करीब 43 से 45 चोटें थीं और कई जगह सिगरेट से जलाने जैसे घाव भी दिखे। यह बताता है कि बच्चे को सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि लगातार प्रताड़ित किया गया होगा। परिवार का आरोप है कि गुरुकुल में बच्चों को शिक्षा के नाम पर शारीरिक काम कराया जाता था और गलती होने पर कठोर दंड दिया जाता था।
शव घर के बाहर छोड़कर भागने का आरोप
घटना के बाद संचालक पर आरोप है कि वह दिव्यांश का शव कार से उसके घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। जैसे ही परिजनों ने बच्चे के शरीर पर चोटों के निशान देखे, परिवार में कोहराम मच गया। इसके बाद गुरुकुल और संचालक के खिलाफ हत्या और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए।
गिरफ्तारी के बाद कबूलनामा
पुलिस ने जांच के दौरान गुरुकुल संचालक और उसकी साथी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में संचालक ने बताया कि वह दिव्यांश को अनुशासन सिखाने के नाम पर दंड देता था, लेकिन गुस्से में मारपीट ज्यादा हो गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चे की मौत किस चोट से हुई और क्या उसे समय पर इलाज मिलता तो उसकी जान बच सकती थी।
बाल सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक बच्चे की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि उन संस्थानों की निगरानी पर भी सवाल उठाती है जहां बच्चे पढ़ाई के नाम पर रह रहे हैं। अगर किसी गुरुकुल, हॉस्टल या निजी संस्थान में बच्चों से काम कराया जाता है, भूखा रखा जाता है या मारपीट होती है, तो यह गंभीर अपराध है। दिव्यांश की मौत ने बाल संरक्षण, संस्थागत पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है।
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