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Education & Jobs

US Visa Update: H-1B पर प्रस्तावित रोक और भारतीयों की बढ़ती चिंता

25 Apr 2026 Zinkpot

 

 नया बिल: क्या है “End H-1B Visa Abuse Act 2026”?

अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर बहस तेज हो गई है। रिपब्लिकन सांसद Eli Crane ने “End H-1B Visa Abuse Act 2026” नाम का बिल पेश किया है। इस बिल का मकसद कथित रूप से H-1B सिस्टम के “दुरुपयोग” को रोकना और अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियों की सुरक्षा बढ़ाना है। प्रस्ताव में नए H-1B वीजा जारी करने पर करीब 3 साल तक रोक लगाने की बात कही गई है, जिससे विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम के अवसर सीमित हो सकते हैं।

 

 H-1B वीजा कैसे काम करता है?
H-1B वीजा अमेरिका का एक Non-immigrant वर्क वीजा है, जिसके तहत कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों को “specialty occupations” (जैसे IT, इंजीनियरिंग, फाइनेंस) में नौकरी देती हैं। यह वीजा आमतौर पर 3 साल के लिए दिया जाता है, जिसे 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है। आवेदन प्रक्रिया USCIS के जरिए होती है, जिसमें lottery system लागू होता है क्योंकि आवेदन संख्या बहुत ज्यादा होती है।

 

 OPT और H-4 EAD पर भी खतरा
केवल H-1B ही नहीं, बल्कि F-1 छात्रों के लिए Optional Practical Training (OPT) और H-4 वीजा धारकों के लिए Work Authorization (EAD) को भी खत्म करने की मांग उठ रही है।
इसका मतलब है कि विदेशी छात्र पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम नहीं कर पाएंगे और H-1B वीजा धारकों के परिवार (खासकर spouses) की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।

 

 भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा?
भारत H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है। अगर यह बिल कानून बनता है, तो:

  • लाखों भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में नौकरी के मौके घट जाएंगे
  • छात्र (STEM और Non-STEM) के लिए पढ़ाई के बाद करियर बनाना मुश्किल होगा
  • H-4 EAD खत्म होने से परिवारों की आय और स्थिरता प्रभावित होगी

यह बदलाव भारत के एजुकेशन-टू-USA माइग्रेशन मॉडल पर सीधा असर डाल सकता है।

 

 आगे क्या हो सकता है?

यह बिल अभी केवल प्रस्ताव (proposal) है और कानून बनने के लिए इसे अमेरिकी कांग्रेस से पास होना होगा। टेक कंपनियां, इमिग्रेशन ग्रुप्स और इंडियन डायस्पोरा इसका विरोध कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, Canada, Australia और United Kingdom जैसे देश इस मौके का फायदा उठाकर भारतीय टैलेंट को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

 

 निष्कर्ष

H-1B पर संभावित 3 साल की रोक, OPT और H-4 EAD पर खतरा—ये सब मिलकर अमेरिका में “लोकल vs विदेशी वर्कर्स” की बहस को और तेज कर रहे हैं। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीय युवाओं, छात्रों और IT प्रोफेशनल्स के करियर पर पड़ेगा।

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