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Health & Fitness

पर्यावरण की दिशा में बड़ा कदम: पान मसाला पैकेजिंग से हटेगा प्लास्टिक

29 Apr 2026 Zinkpot

पहल का परिचय

भारत में बढ़ते प्लास्टिक कचरे की समस्या को देखते हुए Food Safety and Standards Authority of India ने एक बड़ा कदम उठाया है। 28 अप्रैल 2026 को जारी ड्राफ्ट खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) संशोधन नियम, 2026 के तहत पान मसाला, गुटखा और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा गया है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

 

किन-किन प्लास्टिक पर लगेगा प्रतिबंध

इस प्रस्ताव के तहत कई प्रकार की प्लास्टिक सामग्री पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसमें पॉलीथीन, PVC (पॉलीविनाइल क्लोराइड), पॉलीप्रोपाइलीन और एल्यूमिनियम फॉयल आधारित मल्टी-लेयर पैकेजिंग शामिल हैं। ये सभी सामग्री आमतौर पर पान मसाला और गुटखा की पैकिंग में उपयोग होती हैं और बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करती हैं।

 

नई पैकेजिंग सामग्री क्या होगी

FSSAI के प्रस्ताव के अनुसार अब इन उत्पादों की पैकेजिंग के लिए कागज, पेपरबोर्ड और सेल्युलोज जैसी पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा। ये सामग्री बायोडिग्रेडेबल होती हैं और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाती हैं। साथ ही, यह बदलाव प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 के अनुरूप भी है, जिससे नीति में एकरूपता बनी रहेगी।

 

उद्योग के लिए चुनौती और अवसर

इस बदलाव से पान मसाला और तंबाकू उद्योग के सामने नई चुनौतियां आएंगी। कंपनियों को अपनी मौजूदा पैकेजिंग तकनीक बदलनी होगी, जिससे लागत बढ़ सकती है। हालांकि, यह बदलाव उन्हें इको-फ्रेंडली और सस्टेनेबल उत्पादों की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी देगा, जो भविष्य की मांग के अनुरूप है।

 

खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानक

नई पैकेजिंग सामग्री को सख्त खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पैकेजिंग से उत्पाद के स्वाद, खुशबू या गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। साथ ही, “माइग्रेशन लिमिट्स” का पालन अनिवार्य होगा, ताकि पैकेजिंग से कोई हानिकारक रसायन खाद्य पदार्थ में न मिल सके।

 

सरकार का समर्थन और नीति दिशा

इस प्रस्ताव को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की मंजूरी मिल चुकी है, जो यह दर्शाता है कि सरकार पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रही है। यह कदम भारत को प्लास्टिक मुक्त और सस्टेनेबल विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का हिस्सा है।

 

पर्यावरण पर संभावित प्रभाव

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो पान मसाला और गुटखा पैकेजिंग से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे में काफी कमी आएगी। ये उत्पाद अक्सर सिंगल-यूज पैकेजिंग में आते हैं, जो सड़क, नालियों और जल स्रोतों में प्रदूषण फैलाते हैं। इको-फ्रेंडली पैकेजिंग से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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